
एक स्त्री जब पूर्ण होती है ,जब उसके अंदर एक बीज प्रस्फुटित होता है,वरना बांझ,कुलक्षिणी,और पता नहीं किस किस नाम से पुकारी जाती है।
Listen to बांझ by Sangeeta MP3 song. बांझ song from Sangeeta is available on Audio.com. The duration of song is 03:35. This high-quality MP3 track has 1058.4 kbps bitrate and was uploaded on 30 Nov 2022. Stream and download बांझ by Sangeeta for free on Audio.com – your ultimate destination for MP3 music.










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टेश एक कहानी बांच है। शादी के आठ सान भुली तो थे और अभी तक महेश और पहमा के अगर नहीं थे। बच्चे की किलकारी भी नहीं कुछे थे। देवा की शादी को अभी टेसी थार देते थे तो नन्य मेमान का आपमन भी हो गया थे। घर के कोने कोने में नन्य बच्चे के किलकारीया पूछ रही थी। सास ने पूरी काउंग में लडू बटवाए धूल बजवाए चठी भूजन का आयंजन भी होने बाला था जिसकी तैयारी पौपा जोरो दोस्ते। महिमा दौड़ दूर कर सारी काम लिप्टा रही थी और देवारी की सेवा भी कर थी। चठी के दिन सास ने महिमा से कहा सब महिमा कमरी से बाहर मत निकलना। शुबकारी में वैसे भी तुम्हारा कोई काम नहीं। काउंग की अर्टोने तो वैसे भी ताना मार मार कर हमारा � प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्र� प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्र� प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्रवाद प्र� महेश ने महीमा से वादा लिया था कि वड़ इस बास को किसी से न बताया महीमा ने इसकी बास मान भी ली थी क्योंकि उसके भी अध्वास था कि औरत से ज़्यादा मर्द की खिल्ली उड़ायी जाती है समाज में महेश ने किसी तरह महीमा के हाथ पैठ चोड़ कर मनाया आज तान तुम ढुप जा। कर्ल नया सवेरा होता हमारी बिदली महीमा रुप गई बोनों की आखों में नील कहा राज कमरे की चखने हाथ से निकल गई भोर में कब आख रख गई पता ही नहीं चला महेश की मा महीम आप कुछ नहीं करेगी हम दोनों अनाथालाई जा रहे हैं बच्चा गोध लेगी और हाँ मा एक बात और कहना है मा नहीं पन पाने का तारण महीमा नहीं है बलकी मैं हूँ महीमा तयार हो जाओ महेश की मा को अपने काना पर विध्वास नहीं हो रहा था पूरे घर में कोह

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